राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

सावन आयो री सखी, झूले कदम की डार।
मृदुल कृष्ण युगल छवि, निरखत बारंबार॥

॥ चौपाई ॥

राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा।
सावन की रुत आई, महके री कजरा॥
राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा॥

रेशम की डोरी कदम पे बंधाई।
फूलों से सेज हिंडोले सजाई॥
कान्हा झुलावे तोहे प्यारी सुंदरा।
राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा॥

रिमझिम रिमझिम फुहारें पड़त हैं।
मयूर नाचे पपिहा रटत हैं॥
बरसे अमृत रस ब्रज में सुखदा।
राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा॥

मृदुल कृष्ण गावे ये सावन मल्हार।
राधा कृष्ण झूलें आनंद अपार॥
जय जय श्री राधे बरसाने वाली।
राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा॥

॥ दोहा ॥

हिंडोले झूलत युगल वर, बरसत प्रेम फुहार।
मृदुल कृष्ण नयनों बसे, बांकेबिहारी यार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

वृंदावन में सावन के महीने में कदम की डाली पर श्री राधा-कृष्ण के झूलन महोत्सव (हिंडोला लीला) का रसमयी ब्रज उत्सव।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।