ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहु सीतल hoy॥
बरसाने की लाडली श्री राधा, कृपा दृष्टि बरसाओ।
श्यामा प्यारी भानुदुलारी, हृदय कमल में आओ॥
चरण शरण की दासी बना लो, प्रेम सुधा रस दीजै।
राधा नाम रटे जो निसिदिन, भव बंधन हरि लीजै॥
नाम जपे से पाप नशावे, जन्म मरण के फेर मिटावे।
संतन के संग मन रंग लीजै, जीवन सफल बनावे॥
हारे के सहारे खाटू श्याम हमारे, लखदातार कन्हैया।
शीश के दानी शरण तुम्हारी, पार लगा दो नैया॥
फाल्गुन मेले भक्त पुकारे, निशान हाथ में सोहे।
तेरी कृपा से बिगड़े बनते, रूप अनुपम मोहे॥
तुका म्हणे विट्ठल नाम, तारी सकल भुवन।
प्रेम भावे कीर्तन करितां, पावे समाधान॥