राधा नाम की मस्ती छाई रे ब्रज मंडल में

इंद्रेश जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन इंद्रेश जी महाराज
॥ दोहा ॥

मस्त भयो मन मगन होय, राधा नाम अधार।
इंद्रेश डुबकी मारसी, प्रेम सिंधु मंझार॥

॥ चौपाई ॥

राधा नाम की मस्ती छाई रे ब्रज मंडल में।
सब झूम रहे आनंद में, इस रस के समंदर में॥
राधा नाम की मस्ती छाई रे॥

राधा नाम जो मुख से बोले, उसके भाग्य के ताले खोले।
दुख संताप कभी ना आवे, मन उसका आनंद में डोले॥
अमृत रस बरस रहा हर घर में, ब्रज मंडल में।
राधा नाम की मस्ती छाई रे॥

गोप ग्वाल सब नाचन लागे, राधा नाम की धुन में जागे।
कान्हा भी बंशी बजावे, राधा नाम पे बलिहारी भागे॥
खो गए सब इस पावन मंजर में, ब्रज मंडल में।
राधा नाम की मस्ती छाई रे॥

इंद्रेश कहे तुम भी रस पी लो, राधा नाम से जीवन जी लो।
भवसागर से तर जाओगे, अमृत से मन को सींच लो॥
परमानंद समाया हिय के अंदर में, ब्रज मंडल में।
राधा नाम की मस्ती छाई रे ब्रज मंडल में॥

॥ दोहा ॥

राधा नाम महामंत्र है, कलि मल हरण सुजान।
इंद्रेश जपत मगन रहे, पावे प्रेम विहान॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री राधा नाम संकीर्तन के अलौकिक आनंद और ब्रज में छाए भगवत्प्रेम के उल्लास का मधुर वर्णन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।