॥ दोहा ॥
गोकुल ढूंढ्यो मथुरा ढूंढ्यो, ढूंढ्यो बन बन माँहि।
श्याम सलोना ना मिल्यो, नैनन चैन न पाँहि॥
॥ चौपाई ॥
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा।
श्याम देखा माखनचोर देखा॥
गैया चराते कोई कान्हा को देखा, मुरली बजाते घनश्याम को देखा।
यमुना के तीर पे कदम की छाँव में, रास रचाते भगवान को देखा॥
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा॥
॥ दोहा ॥
घट घट वासी सांवरा, हृदय कमल में वास।
साध्वी पूर्णिमा कहत है, पूरण होवे आस॥