राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

गोकुल ढूंढ्यो मथुरा ढूंढ्यो, ढूंढ्यो बन बन माँहि।
श्याम सलोना ना मिल्यो, नैनन चैन न पाँहि॥

॥ चौपाई ॥

राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा।
श्याम देखा माखनचोर देखा॥

गैया चराते कोई कान्हा को देखा, मुरली बजाते घनश्याम को देखा।
यमुना के तीर पे कदम की छाँव में, रास रचाते भगवान को देखा॥

राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा॥

॥ दोहा ॥

घट घट वासी सांवरा, हृदय कमल में वास।
साध्वी पूर्णिमा कहत है, पूरण होवे आस॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री राधा रानी द्वारा गोकुल, वृंदावन और यमुना तट की कुंज गलियों में अपने प्राणप्रिय श्याम को ढूंढने का विरह व प्रेम रस से भरा अमर भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।