॥ दोहा ॥
मदन गोपाल स्वरूप अनूप, त्रिभुवन मन को मोहे।
जाके चरण कमल रज पावत, सुर नर मुनि मन सोहे॥
॥ चौपाई ॥
प्यारो मदन गोपाल हमारा, हम मदन गोपाल के।
सांवरिया सरकार हमारा, हम सांवरिया सरकार के॥
उसकी कृपा से चलती सांसे, उसका दिया ये जीवन।
उसके चरणों में अर्पण है, मेरा सारा तन और मन॥
राधे राधे श्याम मिलादे, मुरली मधुर बजावे।
पूनम दीदी प्रेम मगन हो, हरि के गुण नित गावे॥
प्यारो मदन गोपाल हमारा, हम मदन गोपाल के॥
॥ दोहा ॥
गोपाल हमारे प्राण हैं, हम गोपाल के दास।
सदा रहे मन मंदिर में, सांवरिया को वास॥