प्यारे करुँगी कपोलन लाल

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

प्यारे करुँगी कपोलन लाल, लाल मेरी अंगिया न छुवौ

प्यारे करुँगी कपोलन लाल, लाल मेरी अंगिया न छुवौ ॥1॥

यह अंगिया नहीं धनुष जनक को, छुवत टूट्यो तत्काल ।

नहीं अंगिया गौतम की नारी, छूवत उठी नंदलाल ॥2॥

कहा विलोकत भृकुटी कुटिल कर, नहीं ये पूतना ख्याल ।

यह अंगिया काली मत समझो, जाय नाथ्यो पाताल ॥3॥

गिरिवर ऊठाय भयौ गिरिधारी, नहीं जान्यो ब्रजबाल ।

जावौजी खेलौ सखन संग मिली, गौरव के प्रतिपाल ॥4॥

इतनी सुन मुसिकाय सांवरो, लीनौ अबीर गुलाल ।

॥ दोहा ॥

सूरदास प्रभु निरखि छिरकि अंग,सखियन कियौ निहाल ॥5॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।