पूज्य श्री मोटा

संत सूरदास
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Pujya Shree Mota Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल | पूज्य श्री मोटा

असली नाम: चुनीलाल आशाराम भावसार

अन्य नाम – मोटा, पूज्य श्री मोटा भाई महाराज

गुरु - श्री केशवानंदजी महाराज

आराध्य - हरि ॐ

जन्म – 4 सितंबर, 1898

जन्म स्थान – सावली, पंचमहल ज़िले का एक गाँव, गुजरात

निधन - 23 जुलाई 1976

वैवाहिक स्थिति – विवाहित

पिता - आशाराम भगत

माता - सूरजबा

प्रसिद्धि – भक्ति संत

संस्थापक - हरि ॐ आश्रम

पूज्य श्री मोटा एक आध्यात्मिक नेता थे जिन्होंने भारत के गुजरात में नडियाद और सूरत में आश्रम स्थापित किए। पूज्य श्री मोटा ने अपनी पूजा-अर्चना को किसी एक पारंपरिक मानवीय रूप वाले देवता या ईश्वर के किसी संप्रदाय-विशेष के रूप तक सीमित नहीं रखा। इसके बजाय, वे ईश्वर को सर्वव्यापी वैश्विक चेतना और हर कण व जीव में मौजूद दिव्य ऊर्जा के रूप में देखते थे।

पूज्य श्री मोटा की हरि ॐ के जाप की अवधारणा

तस्वीरों या मूर्तियों की पूजा करने के बजाय, पूज्य श्री मोटा ने सार्वभौमिक मंत्र "हरि ॐ" का उपयोग करते हुए नाम-स्मरण पर ज़ोर दिया। उन्होंने हर साँस के साथ लगातार मंत्र का जाप करने और हृदय व मन की लय को दिव्यता के साथ जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने सिखाया कि इस अभ्यास के लिए किसी जटिल अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं है, जिससे यह जाति, पंथ या धर्म की परवाह किए बिना किसी के भी लिए सुलभ हो जाता है।

पूज्य श्री मोटा ने गुजरात में नडियाद और सूरत के पास दो मुख्य आश्रम स्थापित किए, जहाँ आज भी साधकों के लिए ये 'मौन मंदिर' सक्रिय रूप से संचालित हैं।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

पूज्य श्री मोटा | Pujya Shree Mota

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।