प्रत्येक मनुष्य में अच्छाई और बुराई है - प्रेरक कहानी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गुरु द्रोणाचार्य ने शिक्षा पूरी होने पर कौरव एवं पांडवों के राजकुमारों दुर्योधन तथा युधिष्ठिर को परीक्षा लेने हेतु बुलाया। गुरु द्रोणाचार्य ने सबसे पहले युधिष्ठिर और फिर दुर्योधन को एक अच्छा व्यक्ति ढूंढकर लाने को कहा। दोनों राजुकमार चल अपने-अपने गुरु की आज्ञा अनुसार चल दिए।

सारा दिन खाली हाथ भटकने के बाद शाम को दोंनो वापिस गुरुकुल आए। दुर्योधन बोला, गुरुजी मुझे तो कोई भी भला आदमी नहीं मिला, जिसे में आपके पास लाता। दूसरी ओर युधिष्ठिर ने कहा, गुरुदेव में सभी बुरे कहे जाने वाले व्यक्तियों के पास गया।

उनसे मिलकर मैंने पाया कि उनमें तो अनेक गुण हैं। मुझे कोई व्यक्ति ऐसा नहीं मिला जो पूरी तरह से बुरा हो। क्षमा कीजिए मैं आपके कार्य को नहीं कर पाया।

तब गुरु द्रोण ने कहा: प्रत्येक मनुष्य में अच्छाई और बुराई का संगम है। न कोई पूर्ण है। न कोई संपूर्ण से अच्छा। सवाल हमारे नजरिए का है हम उसमें क्या देखते हैं।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

प्रत्येक मनुष्य में अच्छाई और बुराई है | Pratyek Manushy Mein Achchhai Aur Burai Hai | There is good and evil in every human being.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।