प्रथम गणराज को सुमिरूं, जो रिद्धि सिद्धि दाता है

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जो रिद्धि सिद्धि दाता है,

प्रथम गणराज को सुमिरूँ,

जो रिद्धि सिद्धि दाता है ॥

मेरी अरदास सुन देवा,

तू मूषक चढ़ के आ जाना,

सभा के मध्य आकर के,

हमारी लाज रख जाना,

हमारी लाज रख जाना,

करूँ विनती मैं झुक उनकी,

माँ गौरी जिनकी माता है,

प्रथम गणराज को सुमिरूं,

जो रिद्धि सिद्धि दाता है ॥

क्रिया ना मन्त्र मैं जानू,

शरण में तेरी आया हूँ,

मेरी बिगड़ी बना देना,

चढाने कुछ ना लाया हूँ,

चढाने कुछ ना लाया हूँ,

करूँ कर जोड़ नम नम के,

जो मुक्ति के प्रदाता है,

प्रथम गणराज को सुमिरूं,

जो रिद्धि सिद्धि दाता है ॥

सुनो शंकर सुवन मुझको,

अबुद्धि ज्ञान दे जाओ,

अँधेरे में भटकते को,

धर्म की राह दिखलाओ,

धर्म की राह दिखलाओ,

‘अनिल’ विनती करे उनकी,

विनायक जो कहाता है,

प्रथम गणराज को सुमिरूं,

जो रिद्धि सिद्धि दाता है ॥

जो रिद्धि सिद्धि दाता है,

प्रथम गणराज को सुमिरूँ,

॥ दोहा ॥

जो रिद्धि सिद्धि दाता है ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: प्रथम गणराज को सुमिरूं, जो रिद्धि सिद्धि दाता है | Bhajan: Pratham Ganraj Ko Sumiru Jo Riddhi Siddhi Data Hai Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।