प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

प्रभुजी मोरे/मेरे अवगुण चित ना धरो,

समदर्शी प्रभु नाम तिहारो,

चाहो तो पार करो ।

एक लोहा पूजा मे राखत,

एक घर बधिक परो ।

सो दुविधा पारस नहीं देखत,

कंचन करत खरो ॥

प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो..

प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो,

समदर्शी प्रभु नाम तिहारो,

चाहो तो पार करो ।

एक नदिया एक नाल कहावत,

मैलो नीर भरो ।

जब मिलिके दोऊ एक बरन भये,

सुरसरी नाम परो॥

प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो..

प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो,

समदर्शी प्रभु नाम तिहारो,

चाहो तो पार करो ।

एक माया एक ब्रह्म कहावत,

सुर श्याम झगरो ।

अब की बेर मुझे पार उतारो,

नही पन जात तरो ॥

प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो..

प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो,

समदर्शी प्रभु नाम तिहारो,

चाहो तो पार करो ।

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।