प्रभु! स्वीकारो मेरे परनाम

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सुख-वरण प्रभु, नारायण हे!

दु:ख-हरण प्रभु, नारायण हे!

तिरलोकपति, दाता, सुखधाम,

स्वीकारो मेरे परनाम,

स्वीकारो मेरे परनाम,

स्वीकारो मेरे परनाम, प्रभु!...

मन वाणी में वो शक्ति कहाँ जो,

महिमा तुम्हरी गान करें,

अगम अगोचर अविकारी,

निर्लेप हो, हर शक्ति से परे,

हम और तो कुछ भी जाने ना,

केवल गाते हैं, पावन नाम ,

स्वीकारो मेरे परनाम,

स्वीकारो मेरे परनाम, प्रभु!...

आदि मध्य और अन्त तुम्ही,

और तुम ही आत्म अधारे हो,

भगतों के तुम प्राण प्रभु,

इस जीवन के रखवारे हो,

तुम में जीवें, जनमें तुममें,

और अन्त करें तुम में विश्राम,

स्वीकारो मेरे परनाम,

स्वीकारो मेरे परनाम, प्रभु!...

चरन कमल का ध्यान धरूँ,

और प्राण करें सुमिरन तेरा,

दीनाश्रय दीनानाथ प्रभु,

भव बंधन काटो हरि मेरा,

शरणागत के (घन)श्याम हरि,

हे नाथ, मुझे तुम लेना थाम,

स्वीकारो मेरे परनाम,

स्वीकारो मेरे परनाम, प्रभु!...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।