प्रभु सोच लो जग तुम्हे क्या कहेगा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु सोच लो जग तुम्हे क्या कहेगा,

अगर तेरा प्रेमी दुखड़े सहेगा,

प्रभु सोचलों जग तुम्हे क्या कहेगा ॥

चर्चे तुम्हारी दातारी के ऐसे,

सदा मौज में हैं प्रभु मेरे जैसे,

मुझको मिला गर उन्हें ना मिलेगा,

प्रभु सोचलों जग तुम्हे क्या कहेगा ॥

देते हो सबको बाबा जो भी आये दर पर,

है ऐसा भरोसा सदा श्याम तुम पर,

दानी सदा ही दानी रहेगा,

प्रभु सोचलों जग तुम्हे क्या कहेगा ॥

सदा हमने सबको ये ही बताया,

तुमने किसी को ना खाली लौटाया,

भक्तों का दाता गर भरोसा डिगेगा,

प्रभु सोचलों जग तुम्हे क्या कहेगा ॥

‘संजय’ पे बरसी जैसे कृपा सब पे बरसे,

कोई ना तेरी कृपा को है तरसे,

‘रोमी’ की अर्ज़ी जो तू ना सुनेगा,

प्रभु सोचलों जग तुम्हे क्या कहेगा ॥

प्रभु सोच लो जग तुम्हे क्या कहेगा,

अगर तेरा प्रेमी दुखड़े सहेगा,

॥ दोहा ॥

प्रभु सोचलों जग तुम्हे क्या कहेगा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।