चरण कमल बंदौ हरि राई, जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै।
अंधे को सब कुछ दरसाई, बहिरो सुनै मूक पुनि बोलै॥
प्रभु राम तुम्हारे चरणों में, जीवन समर्पित है।
यह मन मंदिर यह तन मंदिर, तुमको ही अर्पित है॥
प्रभु राम तुम्हारे चरणों में॥
संसार की झूठी माया से, अब दूर हटा लो तुम।
अपनी पावन भक्ति का, अमृत बरसा दो तुम॥
तेरे नाम की ज्योति से, यह घट आलोकित है।
प्रभु राम तुम्हारे चरणों में, जीवन समर्पित है॥
जब जब भी विपदा आई, तूने ही मुझे उबारा।
डूबती हुई नैया को, तूने ही दिया सहारा॥
सारे जग में प्रभु जी, तेरा ही नाम वंदित है।
प्रभु राम तुम्हारे चरणों में, जीवन समर्पित है॥
कन्हैया मित्तल गाए स्तुति, रघुकुल शिरोमणि की।
सदा रहे मेरे सिर पर, छाया प्रभु श्री राम की॥
प्रभु राम तुम्हारे चरणों में, जीवन समर्पित है॥
राम सिया राम सिया राम जय जय राम।
कन्हैया मित्तल जपे नित्य, मिले परम विश्राम॥