फूलों में सज रहे हैं श्री वृंदावन बिहारी

मृदुल कृष्ण शास्त्री
श्री कृष्ण भजन भजन मृदुल कृष्ण शास्त्री
॥ दोहा ॥

फूल बंगला सजो अति सुंदर, महके वृंदावन धाम।
मृदुल कृष्ण नयनों बसे, युगल रूप अभिराम॥

॥ चौपाई ॥

फूलों में सज रहे हैं, श्री वृंदावन बिहारी।
और संग सज रही हैं, वृषभानु की दुलारी॥
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृंदावन बिहारी॥

टेढ़ा मुकुट है सिर पर, टेढ़ी लटक रही है।
बंशी मधुर अधर पर, अमृत टपक रही है॥
गल मोतियन की माला, चमके छटा तिहारी।
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृंदावन बिहारी॥

चंपा चमेली बेला, कलियों का हार सुंदर।
रजनीगंधा महकती, ब्रज भूमि के अंदर॥
सुरभित पवन सुहानी, बलिहारी कुंजबिहारी।
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृंदावन बिहारी॥

मृदुल कृष्ण गावे छवि, अति दिव्य मनोहारी।
राधा संग विराजे, बांके कुंजबिहारी॥
फूलों में सज रहे हैं, श्री वृंदावन बिहारी।
और संग सज रही हैं, वृषभानु की दुलारी॥

॥ दोहा ॥

पुष्प सुगंधित सेज पर, राजत युगल किशोर।
मृदुल कृष्ण मन भृंग सम, लटके चरणन ओर॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

वृंदावन में श्री बांके बिहारी जी के भव्य फूल बंगले के दिव्य दर्शन और श्री राधा-कृष्ण युगल सरकार के पुष्प श्रृंगार की मनोरम झांकी।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।