फूलों में सज रहे हैं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

फूलों में सज रहे हैं,

श्री वृन्दावन बिहारी,

और साथ सज रही है,

वृषभानु की दुलारी ॥

टेढ़ा सा मुकुट सर पर,

रखा है किस अदा से,

करुणा बरस रही है,

करुणा भरी निगाह से,

बिन मोल बिक गयी हूँ,

जब से छबि निहारी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥

बहियाँ गले में डाले,

जब दोनों मुस्कुराते,

सब को ही प्यारे लगते,

सब के ही मन को भाते,

इन दोनों पे मैं सदके,

इन दोनों पे मैं वारी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥

श्रृंगार तेरा प्यारे,

शोभा कहूँ क्या उसकी,

इत पे गुलाबी पटका,

उत पे गुलाबी साड़ी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥

नीलम से सोहे मोहन,

स्वर्णिम सी सोहे राधा,

इत नन्द का है छोरा,

उत भानु की दुलारी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥

टेढ़ी सी तेरी चितवन,

हर एक अदा है बांकी,

बांके के बांके नैना,

मारे जिगर कटारी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥

चुन चुन के कलिया जिसने,

बंगला तेरा बनाया,

दिव्य आभूषणों से,

जिसने तुझे सजाया,

उन हाथों पे मैं सदके,

उन हाथों पे मैं वारी,

फूलों में सज रहे है,

श्री वृन्दावन बिहारी ॥

फूलों में सज रहे हैं,

श्री वृन्दावन बिहारी,

और साथ सज रही है,

॥ दोहा ॥

वृषभानु की दुलारी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।