पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

मीरा बाई
श्री राम भजन भजन मीरा बाई
॥ दोहा ॥

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा करि अपनायो॥

॥ चौपाई ॥

जनम-जनम की पूंजी पाई, जग में सभी खोवायो।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो...

खरचै नहिं कोई चोर न लेवै, दिन-दिन बढ़त सवायो।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो...

सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तरि आयो।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो...

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरषि-हरषि जस गायो।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो...

॥ दोहा ॥

अमोलक धन यह राम नाम का, जो पावे सो तरि जाय।
कहत कबीर अरु कहत मीरा, हरि भजि मुक्ति पाय॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

सद्गुरु की कृपा से प्राप्त राम-नाम रूपी अमूल्य आध्यात्मिक धन की महिमा का मीरा बाई द्वारा गाया गया अमर गान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।