पार्वती वल्लभा अष्टकम्

संत सूरदास
महादेव मंत्र Mantra Gauri Shankar Mantra
॥ पावन पाठ ॥

नमो भूथ नाधम नमो देव देवं,

नाम कला कालं नमो दिव्य थेजं,

नाम काम असमं, नाम संथ शीलं,

भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं ।

सदा थीर्थ सिधं, साध भक्था पक्षं,

सदा शिव पूज्यं, सदा शूर बस्मं,

सदा ध्यान युक्थं, सदा ज्ञान दल्पं,

भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं ।

स्मसानं भयनं महा स्थान वासं,

सरीरं गजानां सदा चर्म वेष्टं,

पिसचं निसेस समा पशूनां प्रथिष्टं,

भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं ।

फनि नाग कन्दे, भ्जुअन्गःद अनेकं,

गले रुण्ड मलं, महा वीर सूरं,

कादि व्यग्र सर्मं., चिथ बसम लेपं,

भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं ।

सिराद शुद्ध गङ्गा, श्हिवा वाम भागं,

वियद दीर्ग केसम सदा मां त्रिनेथ्रं,

फणी नाग कर्णं सदा बल चन्द्रं,

भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं ।

करे सूल धरं महा कष्ट नासं,

सुरेशं वरेसं महेसं जनेसं,

थाने चारु ईशं, द्वजेसम्, गिरीसं,

भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं ।

उधसं सुधासम, सुकैलस वासं,

दर निर्ध्रं सस्म्सिधि थं ह्यथि देवं,

अज हेम कल्पध्रुम कल्प सेव्यं,

भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं ।

मुनेनं वरेण्यं, गुणं रूप वर्णं,

ड्विज संपदस्थं शिवं वेद सस्थ्रं,

अहो धीन वत्सं कृपालुं शिवं,

भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं ।

सदा भव नाधम, सदा सेव्य मानं,

सदा भक्थि देवं, सदा पूज्यमानं,

मया थीर्थ वासं, सदा सेव्यमेखं,

भजे पर्वथि वल्लभं नीलकन्दं ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।