पर्वत से उतर कर माँ, मेरे घर आ जाना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Navratri Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत से उतर कर माँ,

मेरे घर आ जाना,

मैं भी भगत तेरा,

मेरा मान बढ़ा जाना ॥

मैया तेरे बेटे को,

तेरा ही सहारा है,

जब जब कष्ट पड़ा,

मैंने तुम्हे ही पुकारा है,

अब देर करो ना मेरी माँ,

दौड़ी दौड़ी आ जाना,

पर्वत से उतर कर मां,

मेरे घर आ जाना ॥

ना सेवा तेरी जानू,

ना पूजा तेरी जानू,

मैं तो हूँ अज्ञानी माँ,

तेरी महिमा ना जानू,

मैं लाल तू मैया मेरी,

बस इतना ही जाना,

पर्वत से उतर कर मां,

मेरे घर आ जाना ॥

जब आओगी घर माँ,

मैं चरण पखारूँगा,

चरणों की धूल तेरी,

मैं माथे से लगाऊंगा,

मैं चरणों में शीश रखूं,

तुम हाथ बढ़ा जाना,

पर्वत से उतर कर मां,

मेरे घर आ जाना ॥

माँ रहता हूँ हर पल,

बस तेरे ही आधार,

ये मांग रहा है ‘विशाल’,

बस थोड़ा सा प्यार,

माँ अपने ‘महेश; को तू,

आ राह दिखा जाना,

पर्वत से उतर कर मां,

मेरे घर आ जाना ॥

* SantoKiVani Lyrics

पर्वत से उतर कर माँ,

मेरे घर आ जाना,

मैं भी भगत तेरा,

मेरा मान बढ़ा जाना ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।