श्री परशुराम आरती

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती Aarti Parshuram Aarti
॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय परशुधारी,

स्वामी जय परशुधारी ।

सुर नर मुनिजन सेवत,

श्रीपति अवतारी ॥

ॐ जय परशुधारी..॥

जमदग्नी सुत नर-सिंह,

मां रेणुका जाया ।

मार्तण्ड भृगु वंशज,

त्रिभुवन यश छाया ॥

ॐ जय परशुधारी..॥

कांधे सूत्र जनेऊ,

गल रुद्राक्ष माला ।

चरण खड़ाऊँ शोभे,

तिलक त्रिपुण्ड भाला ॥

ॐ जय परशुधारी..॥

ताम्र श्याम घन केशा,

शीश जटा बांधी।

सुजन हेतु ऋतु मधुमय,

दुष्ट दलन आंधी ॥

ॐ जय परशुधारी..॥

मुख रवि तेज विराजत,

रक्त वर्ण नैना ।

दीन-हीन गो विप्रन,

रक्षक दिन रैना ॥

ॐ जय परशुधारी..॥

कर शोभित बर परशु,

निगमागम ज्ञाता ।

कंध चाप-शर वैष्णव,

ब्राह्मण कुल त्राता ॥

ॐ जय परशुधारी..॥

माता पिता तुम स्वामी,

मीत सखा मेरे ।

मेरी बिरद संभारो,

द्वार पड़ा मैं तेरे ॥

ॐ जय परशुधारी..॥

अजर-अमर श्री परशुराम की,

आरती जो गावे ।

'पूर्णेन्दु' शिव साखि,

सुख सम्पति पावे ॥

॥ दोहा ॥

ॐ जय परशुधारी..॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।