परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shri Ram Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,

कृपा के बिना काम चलता नहीं है ।

निराशा निशा नष्ट होती ना तब तक,

दया भानु जब तक निकलता नहीं है ।

दमित वासनाये, अमित रूप ले जब,

अंतः-करण में, उपद्रव मचाती ।

तब फिर कृपासिंधु, श्री राम जी के,

अनुग्रह बिना, काम चलता नहीं है ।

(अनुग्रह बिना, मन सम्हलता नहीं है)

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,

कृपा के बिना काम चलता नहीं है ।

म्रगवारी जैसे, असत इस जगत से,

पुरुषार्थ के बल पे, बचना है मुश्किल ।

श्री हरि के सेवक, जो छल छोड़ बनते,

उन्हें फिर ये, संसार छलता नहीं है ।

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,

कृपा के बिना काम चलता नहीं है ।

सद्गुरू शुभाशीष, पाने से पहले,

जलता नहीं ग्यान, दीपक भी घट में ।

बहती न तब तक, समर्पण की सरिता,

अहंकार जब तक, कि गलता नहीं ।

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,

कृपा के बिना काम चलता नहीं है ।

राजेश्वरानन्द, आनंद अपना,

पाकर ही लगता है, जग जाल सपना ।

तन बदले कितने भी, पर प्रभु भजन बिन,

कभी जन का, जीवन बदलता नहीं ।

परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन,

कृपा के बिना काम चलता नहीं है ।

निराशा निशा नष्ट होती ना तब तक,

दया भानु जब तक निकलता नहीं है ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।