परदेस जा रहे हो, कैसे जियेंगे हम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Vishnu Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

परदेस जा रहे हो,

कैसे जियेंगे हम,

कैसे जियेंगे हम कन्हैया,

कैसे जियेंगे हम,

दिल लेके जा रहे हो,

कैसे जियेंगे हम ॥

नैना बने हो आप ही,

काजल बने थे हम,

जब नैना ही बंद होंगे,

जब नैना ही बंद होंगे,

कैसे जियेंगे हम,

परदेस जा रहे हों,

कैसे जियेंगे हम ॥

मूरत बने थे आप ही,

मंदिर बने थे हम,

जब मंदिर ही बंद होंगे,

जब मंदिर ही बंद होंगे,

कैसे जियेंगे हम,

दिल लेके जा रहे हो,

कैसे जियेंगे हम ॥

चंदा बने थे आप ही,

चकवी बने थे हम,

जब चंदा ही ना रहा तो,

जब चंदा ही ना रहा तो,

कैसे जियेंगे हम,

दिल लेके जा रहे हो,

कैसे जियेंगे हम ॥

ऐसी क्या भूल हो गई,

मुझसे मेरे प्रीतम,

जब साँसे ना रही तो,

जब साँसे ना रही तो,

कैसे जियेंगे हम,

परदेस जा रहे हों,

कैसे जियेंगे हम ॥

कैसी है प्रीति तेरी,

कैसी सजा दिया है,

जब प्राण ना रहे तो,

जब प्राण ना रहे तो,

कैसे जियेंगे हम,

परदेस जा रहे हों,

कैसे जियेंगे हम ॥

परदेस जा रहे हो,

कैसे जियेंगे हम,

कैसे जियेंगे हम कन्हैया,

कैसे जियेंगे हम,

दिल लेके जा रहे हो,

॥ दोहा ॥

कैसे जियेंगे हम ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।