पकड़ लो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाएंगे

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

मंझधार में अटकी नाव है, तू ही खेवनहार।
देवी चित्रलेखा पुकारती, बांके कुंजबिहार॥

॥ चौपाई ॥

पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे।
हमारा कुछ ना बिगड़ेगा, तुम्हारी लाज जाएगी॥
पकड़ लो हाथ बनवारी॥

फंसी है भंवर में नैया, इसे अब पार कर देना।
जमाना ताने देता है, दया की दृष्टि कर देना॥
तेरे ही नाम की पतवार, लेके हम चले आए।
पकड़ लो हाथ बनवारी॥

गुनाहों से भरा जीवन, संवारो हे दयानिधि।
तुम्हारी एक कृपा से, मिले सब सुख और निधि॥
शरण में आ गए कान्हा, हमें तुम क्यों भुलाओगे।
पकड़ लो हाथ बनवारी॥

देवी चित्रलेखा गावे, कन्हैया लाज रख लेना।
बरसाने की श्यामा संग, सदा ही साथ दे देना॥
चरण की धूलि पाकर के, हम भव से तर जाएंगे।
पकड़ लो हाथ बनवारी, नहीं तो डूब जाएंगे॥

॥ दोहा ॥

दीनानाथ दयाल प्रभु, राखहु मेरी टेक।
देवी चित्रलेखा शीश धरे, तू ही आधार एक॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

संसार रूपी भवसागर में फंसी नाव को उबारने के लिए श्री कृष्ण से हाथ थामने की आर्त पुकार।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।