श्री अनंता मधुसूदना - आरती

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती Aarti Shri Ananta Madhusudana Aarti
॥ पावन पाठ ॥

श्री अनंता मधुसूदना। पद्मनाभा नारायणा।

जगव्यापका जनार्दना। आनंदघना अविनाशा॥

सकळ देवाधिदेवा। कृपाळु व्हा जी केशवा।

महानंदा महानुभवा। सदाशिवा सहजरूपा॥

चक्रधरा विश्वंभरा। गरूडध्वजा करूणाकरा।

सहस्त्रपादा सहस्त्रकरा। क्षिरसागरा शेषशयना॥

कमलनयना कमलापती। कामिनीमोहना मदनमूर्ती।

भवतारका धरी त्या क्षिती। वामनमूर्ती त्रिविक्रमा॥

अगा हे सगुणा निर्गुणा। जगजनित्या जगजिवना।

वसुदेव देवकीनंदना। बाळ रांगना बाळकृष्णा॥

तुका आला लोटांगणी। मज ठाव द्यावा जी चरणी।

॥ दोहा ॥

हेचि करीतसे विनवणी। भवबंधनी सोडवावे॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।