ॐ जय जगन्नाथ हरे

पारंपरिक
अन्य आरती Aarti Shri Jagganath Aarti
॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय जगन्नाथ हरे

प्रभु जय जगन्नाथ हरे

भक्तों के हितकारी

भक्तों के हितकारी

मंगल सदा करे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

अगर कपूर बत्ती से आरती तेरी करे

प्रभु आरती तेरी करे

झाल मृदंग बजाएं

झाल मृदंग बजाएं

चारणों मैं सीष धरे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

प्रभु जय जगन्नाथ हरे

भक्तों के हितकारी

भक्तों के हितकारी

मंगल सदा करे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

रूप अनुप अनेक आपका

देखके सुख पौन्न

प्रभु देखके ऐसे पौन

बहन सुभद्रा संग है

बहन सुभद्रा संग है

और है बाल ताऊ

ॐ जय जगन्नाथ हरे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

प्रभु जय जगन्नाथ हरे

भक्तों के हितकारी

भक्तों के हितकारी

मंगल सदा करे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

नीलंचनल से आयें को उधर

प्रभु करणे को उद्धार

कृपा बनी रहती है

कृपा बनी रहती है

भक्तों पे सदा अपार

ॐ जय जगन्नाथ हरे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

प्रभु जय जगन्नाथ हरे

भक्तों के हितकारी

भक्तों के हितकारी

मंगल सदा करे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

सारे जग के स्वामी प्रभु जगन्नाथ तुम हो

प्रभु जगन्नाथ तुम हो

सदा भगतों के सर पे

सदा भगतों के सर पे रखे हात तुम हो

ॐ जय जगन्नाथ हरे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

प्रभु जय जगन्नाथ हरे

भक्तों के हितकारी

भक्तों के हितकारी

मंगल सदा करे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

महाप्रसाद तुम्हारा जो भी कोई पाये

प्रभु जो भी कोई पाये

तन मन दोनो पवन

तन मन दोनो पवन उनके हो जाये

ॐ जय जगन्नाथ हरे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

प्रभु जय जगन्नाथ हरे

भक्तों के हितकारी

भक्तों के हितकारी

मंगल सदा करे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

संतो की वाणी आरती शरण मैं अपनी लेकर प्रभु करो उधर

प्रभु करो उधर

भव सागर से हो जाए फिर तो नए पार

ॐ जय जगन्नाथ हरे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

प्रभु जय जगन्नाथ हरे

भक्तों के हितकारी

भक्तों के हितकारी

मंगल सदा करे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

जगन्‍नाथ की आरती जो भी नर गई

प्रभु प्रेम सही गये

मन बंचित वर भक्तन

मन बंचित वर भक्तन उनको मिल जाए

ॐ जय जगन्नाथ हरे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

प्रभु जय जगन्नाथ हरे

भक्तों के हितकारी

भक्तों के हितकारी

मंगल सदा करे

ॐ जय जगन्नाथ हरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।