ओंकार स्वरूपा सदगुरु समर्था

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ओंकार स्वरूपा सदगुरु समर्था

अनाथाच्या नाथा तुज नमो॥ धृ ॥

नमो मायबापा गुरु कृपाघना

तोडी या बंधना मायामोहा

मोहोजाल माझे कोण निरशील

तुजविण दयाला सदगुरुराया॥ 1 ॥

सदगुरु राया माझा आनंदसागर

त्रैलोक्या आधार गुरुराव

गुरुराव स्वामी असे स्वयंप्रकाश

ज्यापुढे उदास चंद्र, रवी

रवी, शशी, अग्नी नेणती ज्या रुपा

स्वप्रकाश रुपा नेणे वेद ॥ 2 ॥

एका जनार्दनी गुरु परब्रम्ह

॥ दोहा ॥

तयाचे पै नाम सदा मुखी ॥ 3 ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ओंकार स्वरूपा सदगुरु समर्था | Omkar Swarupa Sadguru Samartha

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।