ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (द्वादशाक्षर मंत्र)

श्रीमद्भागवत पुराण
विष्णु भगवान मंत्र मंत्र विष्णु
॥ दोहा ॥

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

॥ चौपाई ॥

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

भावार्थ:
सर्वव्यापी, सर्वसमर्थ, आनंदस्वरूप भगवान श्री कृष्ण/नारायण को मेरा कोटि-कोटि नमन है।

महत्व:
यह द्वादशाक्षर (बारह अक्षरों वाला) मंत्र भक्त ध्रुव को देवर्षि नारद द्वारा प्रदान किया गया था। इसके नियमित जप से मन के समस्त विकार दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

॥ दोहा ॥

नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्रीमद्भागवत महापुराण का यह मूल द्वादशाक्षर महामंत्र साधक को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर भगवद्प्रेम में प्रतिष्ठित करता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।