॥ दोहा ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
॥ चौपाई ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
भावार्थ:
सर्वव्यापी, सर्वसमर्थ, आनंदस्वरूप भगवान श्री कृष्ण/नारायण को मेरा कोटि-कोटि नमन है।
महत्व:
यह द्वादशाक्षर (बारह अक्षरों वाला) मंत्र भक्त ध्रुव को देवर्षि नारद द्वारा प्रदान किया गया था। इसके नियमित जप से मन के समस्त विकार दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
॥ दोहा ॥
नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥