बाबा बालक नाथ आरती

गुरु नानक देव जी
महादेव आरती Aarti Shri Baba Balaknath Aarti
॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय कलाधारी हरे,

स्वामी जय पौणाहारी हरे,

भक्त जनों की नैया,

दस जनों की नैया,

भव से पार करे,

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

बालक उमर सुहानी,

नाम बालक नाथा,

अमर हुए शंकर से,

सुन के अमर गाथा ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

शीश पे बाल सुनैहरी,

गले रुद्राक्षी माला,

हाथ में झोली चिमटा,

आसन मृगशाला ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

सुंदर सेली सिंगी,

वैरागन सोहे,

गऊ पालक रखवालक,

भगतन मन मोहे ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

अंग भभूत रमाई,

मूर्ति प्रभु रंगी,

भय भज्जन दुःख नाशक,

भरथरी के संगी ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

रोट चढ़त रविवार को,

फल, फूल मिश्री मेवा,

धुप दीप कुदनुं से,

आनंद सिद्ध देवा ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

भक्तन हित अवतार लियो,

प्रभु देख के कल्लू काला,

दुष्ट दमन शत्रुहन,

सबके प्रतिपाला ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

श्री बालक नाथ जी की आरती,

जो कोई नित गावे,

कहते है सेवक तेरे,

मन वाच्छित फल पावे ।

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

ॐ जय कलाधारी हरे,

स्वामी जय पौणाहारी हरे,

भक्त जनों की नैया,

भव से पार करे,

ॐ जय कलाधारी हरे ॥

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सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे, भक्त जनों की नैया, दस जनों की नैया, भव से पार करे... Om Jai Kaladhari Hare, Swami Jai Paunahari Hare, Bhakt Janon Ki Naiya, Das Janon Ki Naiya..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।