ओम जय कैला रानी - कैला माता आरती (Om Jai Kaila Rani, Kaila Mata Aarti)

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती Aarti Kaila Mata Aarti
॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय कैला रानी,

मैया जय कैला रानी ।

ज्योति अखंड दिये माँ

तुम सब जगजानी ॥

तुम हो शक्ति भवानी

मन वांछित फल दाता ॥

मैया मन वांछित फल दाता ॥

अद्भुत रूप अलौकिक

सदानन्द माता ॥

ॐ जय कैला रानी।

गिरि त्रिकूट पर आप

बिराजी चामुंडा संगा ॥

मैया चामुंडा संगा ॥

भक्तन पाप नसावौं

बन पावन गंगा ॥

ॐ जय कैला रानी।

भक्त बहोरा द्वारे रहता

करता अगवानी ॥

मैया करता अगवानी ॥

लाल ध्वजा नभ चूमत

राजेश्वर रानी ॥

ॐ जय कैला रानी।

नौबत बजे भवन में

शंक नाद भारी ॥

मैया शंक नाद भारी ॥

जोगन गावत नाचत

दे दे कर तारी ॥

ॐ जय कैला रानी।

ध्वजा नारियल रोली

पान सुपारी साथा ॥

मैया पान सुपारी साथा ॥

लेकर पड़े प्रेम से

जो जन यहाँ आता ॥

ॐ जय कैला रानी ।

दर्श पार्श कर माँ के

मुक्ती जान पाता ॥

मैया मुक्ती जान पाता ॥

भक्त सरन है तेरी

रख अपने साथा ॥

ॐ जय कैला रानी ।

कैला जी की आरती

जो जन है गाता ॥

मैया जो जन है गाता ॥

भक्त कहे भव सागर

पार उतर जाता ॥

ॐ जय कैला रानी,

मैया जय कैला रानी ।

ज्योति अखंड दिये माँ

॥ दोहा ॥

तुम सब जगजानी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।