ओढ़ो जी ओढ़ो दादी, म्हारी भी चुनरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ओढ़ो जी ओढ़ो दादी,

म्हारी भी चुनरिया,

शान से ल्याया थारा,

टाबरिया थारा बालकिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥

राचणी मेहंदी थारे,

हाथां में लगावा,

गजरो बनावा थारे,

जुड़े में सजावा,

फूल मंगाया बढ़िया बढ़िया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥

दादी जी आओ थारे,

भोग लगावा,

हलवा पूड़ी मेवा का,

थाल सजावा,

खीर बनवाई दादी केसरिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥

चुनड़ी ओढ़ाया म्हारो,

मान बढ़ेगो,

और भी थारो,

सिणगार खिलेगो,

‘सोनू’ सरावेगी या सारी दुनिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

म्हारी भी चुनरिया ॥

ओढ़ो जी ओढ़ो दादी,

म्हारी भी चुनरिया,

शान से ल्याया थारा,

टाबरिया थारा बालकिया,

ओढो म्हारी भी चुनरिया,

ओढो जी ओढो दादी,

॥ दोहा ॥

म्हारी भी चुनरिया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।