ओ शेरावाली माँ, क्या खेल रचाया है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ओ शेरावाली माँ,

क्या खेल रचाया है,

तू प्यार का सागर है,

तू मन का किनारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥

देखि है तेरी दुनिया,

क्या रचना रचाई है,

दिन रात के चक्कर में,

कुछ समझ ना आई है,

हर पल जो बीत रहा,

माँ तेरा ईशारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥

महलों में भी दुःख देखे,

और सड़को पे खुशहाली,

कोई राजा है किस्मत का,

कोई किस्मत से खाली,

सब तेरी लीला है,

सब तेरा फ़साना है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥

कोई फूलों पे सो ना सके,

कोई कांटो में हँसता है,

कही मौत हुई सस्ती,

कही जीवन महंगा है,

कोई खुशियों में डूबा है,

कोई गम का मारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥

कोई जन्म से पहले मरे,

कोई मर के भी जीता है,

कोई घाव लगाता है,

कोई जख्मों को सीता है,

ये कैसी हकीकत है,

ये कैसा नजारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥

कोई दुःख को सुख समझे,

कोई सुख में भी रोता है,

आशा और तृष्णा का,

कभी अंत ना होता है,

इस भूल भुलैया में,

पड़ा दास बेचारा है,

ओ शेरावाली मां,

क्या खेल रचाया है ॥

ओ शेरावाली माँ,

क्या खेल रचाया है,

तू प्यार का सागर है,

तू मन का किनारा है,

ओ शेरावाली मां,

॥ दोहा ॥

क्या खेल रचाया है ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।