ओ पालनहारे निर्गुण और न्यारे

जावेद अख्तर
अन्य भजन भजन प्रार्थना
॥ दोहा ॥

ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे, तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं।
हमरी उलझन, सुलझाओ भगवन, तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं॥

॥ चौपाई ॥

तुम्हें हमका हो संभाले, तुम्हीं हमरे रखवाले।
चले हम जिस डगरिया, मिले सुख की बदरिया॥
ओ पालनहारे...

जो दयावान हो, तो दया तुम करो।
दूर संकट करो, आस मन में भरो॥
हारे हुए को सहारा दो, डूबते को किनारा दो।
ओ पालनहारे...

सबके स्वामी हो, अंतर्यामी हो।
हम अज्ञानी हैं, तुम ज्ञानी हो॥
दीन-दुखियों की सुन लो पुकार, कर दो नैया हमारी पार।
ओ पालनहारे...

॥ दोहा ॥

प्रभु जी दया करो, मन में शांति भरो।
तुम्हरे बिन हमरा कौनो नाहीं॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ईश्वर के सर्वव्यापक, निर्गुण और न्यायकारी स्वरूप के प्रति पूर्ण शरणागति और संकटमोचन की आर्त प्रार्थना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।