ओ मेरे गोपाल कन्हैया, मोहन मुरली वाले

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ओ मेरे गोपाल कन्हैया,

मोहन मुरली वाले,

मोहन मुरली वाले,

गोपाल मुरलिया वाले,

ओ मेरे गोपाल कन्हैंया,

मोहन मुरली वाले ॥

कहो कैसे तुझे रिझाऊं रसिया,

गुणवान नहीं धनवान नहीं,

कोई बड़ा जगत में मान नहीं,

फिर कैसे तुम्हे अपनाऊं रसिया,

कहो कैसे तुझे रिझाऊं रसिया ॥

कोई जप तप संयम नियम नहीं,

मेरा गोपियों जैसा प्रेम नहीं,

फिर कैसे तुम्हे रिझाऊं रसिया,

कहो कैसे तुझे रिझाऊं रसिया ॥

कोई गुण का बड़ा भंडार नहीं,

मेरा मीरा जैसा प्यार नहीं,

फिर कैसे तुम्हे मनाऊं रसिया,

कहो कैसे तुझे रिझाऊं रसिया ॥

मेरे भीलनी जैसे बेर नहीं,

तेरे आने में तो देर नहीं,

फिर कैसे भोग लगाऊं रसिया,

कहो कैसे तुझे रिझाऊं रसिया ॥

ओ मेरे गोपाल कन्हैया,

मोहन मुरली वाले,

मोहन मुरली वाले,

गोपाल मुरलिया वाले,

ओ मेरे गोपाल कन्हैंया,

॥ दोहा ॥

मोहन मुरली वाले ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।