ओ मेरा ओ शंकर हो

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

शंभु महादेव जय शंकरा

शंभु महादेव जय शंकरा

शंभु महादेव जय शंकरा

शंभु महादेव जय शंकरा

ओ मेरा ओ शंकर हो

मन में बैठा है तू

ओ मेरा ओ शंकर हो

मौन में बैठा है तू

हो तेरे दर्शन को

हो तेरे दर्शन को

तरसे मेरी रूह

ओ मेरा ओ शंकर हो

मौन में बैठा है तू

हो बैठा कैलाश में तू

अनंत आकाश में तू

हो बैठा कैलाश में तू

अनंत आकाश में तू

हो पग पग मैं चलया

हो पग पग मैं चलया

मिलने की आस में हूँ

मेरेया शंकरा हो

मौन में बैठा है तू

हो तू है तो मैं हूं

तुझ बिन मैं क्या हूँ

हो तू है तो मैं हूं

तुझ बिन मैं क्या हूँ

हो मन बैरागी हुआ

हो मन बैरागी हुआ

तेरी लगन में हूँ

मेरेया शंकरा हो

मौन में बैठा है तू

हो मेरी डोर बंधी

मैं तुझमें समा रहा हूँ

हो मेरी डोर बंधी

मैं तुझमें समा रहा हूँ

हो सांसो की माला में

हो सांसो की माला में

तेरा ही नाम जपूँ

मेरेया शंकरा हो

मौन में बैठा है तू

हो मतलब दे रिश्ते

तेरी दुनिया में कैसे रहूँ

हो मतलब दे रिश्ते

तेरी दुनिया में कैसे रहूँ

हो आऊं जब मिलने

मैं आऊं जब मिलने

शरण में लेना तू

मेरेया शंकरा हो

मौन में बैठा है तू

जग को तारने वाला हो

मेरा भोला भंडारी

कष्ट मिटाने वाला हो

मेरा भोला भंडारी

जग को तारने वाला हो

मेरा भोला भंडारी

कष्ट मिटाने वाला हो

मेरा भोला भंडारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।