निकुंज में विराजे घनश्याम और राधा

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
अन्य भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

युगल रूप की आरती, गावे ब्रज की नार।
राधा मोहन संग रमें, लीला अपरंपार॥

॥ चौपाई ॥

निकुंज में विराजे घनश्याम और राधा, मिटावे जीवन की सकल बाधा।
मंद मंद मुरली बाजे सुहानी, संग में नाचे वृषभानु नंदिनी॥

फूलन की सेज सजी अति न्यारी, बलिहारी जावे सखियाँ सारी।
जय जय राधा जय जय श्याम, जपते रहो नित्य आठों याम॥

॥ दोहा ॥

श्री युगल सरकार की जय, जय जय वृंदावन।
निसिदिन गावे साध्वी, पावन होवे मन॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप की वृंदावन के पावन निकुंजों में रास लीला और दिव्य दर्शन का आनंदमयी पद।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।