॥ दोहा ॥
युगल रूप की आरती, गावे ब्रज की नार।
राधा मोहन संग रमें, लीला अपरंपार॥
॥ चौपाई ॥
निकुंज में विराजे घनश्याम और राधा, मिटावे जीवन की सकल बाधा।
मंद मंद मुरली बाजे सुहानी, संग में नाचे वृषभानु नंदिनी॥
फूलन की सेज सजी अति न्यारी, बलिहारी जावे सखियाँ सारी।
जय जय राधा जय जय श्याम, जपते रहो नित्य आठों याम॥
॥ दोहा ॥
श्री युगल सरकार की जय, जय जय वृंदावन।
निसिदिन गावे साध्वी, पावन होवे मन॥