॥ दोहा ॥
नीले की टापों की ध्वनि, गूँजे चारो ओर।
पूजा सखी बाट जोहे, आजा चितचोर॥
॥ चौपाई ॥
नीले पे चढ़ के आजा, मेरे सांवरिया।
देर ना कर तू प्यारे, मेरे सांवरिया॥
नीले पे चढ़ के आजा॥
आँखें बिछाए बैठी, तेरे इंतज़ार में।
सुधबुध गंवा बैठी हूँ, तेरे ही प्यार में॥
दर्शन दिखा दे आके, मेरे सांवरिया।
नीले पे चढ़ के आजा॥
मोरछड़ी लहराते हुए, विपदा मिटाते हुए।
भक्तों के संकट को, पल में भगाते हुए॥
झोली हमारी भर जा, मेरे सांवरिया।
नीले पे चढ़ के आजा॥
पूजा सखी कहे बाबा, लाज है तेरी अब।
हाथ थाम ले मेरा, तू ही सहारा जब॥
खाटू से दौड़ के आ जा, मेरे सांवरिया।
नीले पे चढ़ के आजा, मेरे सांवरिया॥
॥ दोहा ॥
नीले के असवार की, महिमा है अपरंपार।
पूजा सखी गावे सदा, जय खाटू सरकार॥