नीले पे चढ़ के आजा मेरे सांवरिया

पूजा सखी
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॥ दोहा ॥

नीले की टापों की ध्वनि, गूँजे चारो ओर।
पूजा सखी बाट जोहे, आजा चितचोर॥

॥ चौपाई ॥

नीले पे चढ़ के आजा, मेरे सांवरिया।
देर ना कर तू प्यारे, मेरे सांवरिया॥
नीले पे चढ़ के आजा॥

आँखें बिछाए बैठी, तेरे इंतज़ार में।
सुधबुध गंवा बैठी हूँ, तेरे ही प्यार में॥
दर्शन दिखा दे आके, मेरे सांवरिया।
नीले पे चढ़ के आजा॥

मोरछड़ी लहराते हुए, विपदा मिटाते हुए।
भक्तों के संकट को, पल में भगाते हुए॥
झोली हमारी भर जा, मेरे सांवरिया।
नीले पे चढ़ के आजा॥

पूजा सखी कहे बाबा, लाज है तेरी अब।
हाथ थाम ले मेरा, तू ही सहारा जब॥
खाटू से दौड़ के आ जा, मेरे सांवरिया।
नीले पे चढ़ के आजा, मेरे सांवरिया॥

॥ दोहा ॥

नीले के असवार की, महिमा है अपरंपार।
पूजा सखी गावे सदा, जय खाटू सरकार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

नीले घोड़े के असवार खाटू श्याम बाबा को दर्शन देने और संकट हरने हेतु शीघ्र पधारने की विनती।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।