नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं

पारंपरिक
श्री कृष्ण मंत्र Mantra Shri Ram Mantra
॥ पावन पाठ ॥

नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं सीतासमारोपितवामभागम्।

पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्॥

भावार्थ:

नील कमल के सामान श्यामल, सुन्दर, सांवले और कोमल अंग वाले। जिन के बाई ओर सीता माता विराजमान हो कर के इस दृश्य को और भी सुशोभित करती है।

जिन के दोनों हाथो में अमोघ धनुष और बाण इस प्रिये छबी को और भी निखारते है . उन रघु कुल के शिरोमणि को हम नमस्कार करते है , प्रणाम करते है।

यह अयोध्या कांड का तीसरा श्लोक है। बहुत से लोग रामायण प्रचार से पहले इस सुंदर श्लोक का पाठ करना पसंद करते हैं। जब आप श्री राम कथा सुनाते हैं या इस श्लोक का पाठ सुनते हैं, तो उम्मीद है कि इसे समझना थोड़ा आसान हो जाता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।