नन्द के आनंद भयो - जन्माष्टमी भजन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जन्माष्टमी, गरवा और नवजात शिशु के जन्म बधाई की खुशी में यह गीत/भजन भारत के गुजरात और उत्तर के राज्यों में बहुत लोकप्रिय हैं!

आनंद उमंग भयो,

जय हो नन्द लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो,

जय यशोदा लाल की ।

हाथी घोडा पालकी,

जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो नंदलाल की,

जय यशोदा लाल की ।

गोकुल में आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

॥ आनंद उमंग भयो...॥

आनंद उमंग भयो,

जय हो नन्द लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो,

जय यशोदा लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

आनंद उमंग भयो,

जय हो नन्द लाल की ।

गोकुल में आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो नंदलाल की,

जय यशोदा लाल की ।

हाथी घोडा पालकी,

जय कन्हिया लाल की ॥

आनंद उमंग भयो,

जय हो नन्द लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो,

जय यशोदा लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

आनंद उमंग भयो,

जय हो नन्द लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के,

अधिपति लाल की ।

हाथी घोडा पालकी,

जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये,

जय हो पशुपाल की ।

गोकुल में आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के,

अधिपति लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये,

जय हो पशुपाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

पूनम के चाँद जैसी,

शोभा है बाल की ।

हाथी घोडा पालकी,

जय कन्हिया लाल की ॥

आनंद उमंग भयो,

जय हो नन्द लाल की ।

गोकुल में आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के,

अधिपति लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये,

जय हो पशुपाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

भक्तो के आनंद्कनद,

जय यशोदा लाल की ।

हाथी घोडा पालकी,

जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो यशोदा लाल की,

जय हो गोपाल की ।

गोकुल में आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के,

अधिपति लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये,

जय हो पशुपाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

आनंद से बोलो सब,

जय हो बृज लाल की ।

हाथी घोडा पालकी,

जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो बृज लाल की,

पावन प्रतिपाल की ।

गोकुल में आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के,

अधिपति लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये,

जय हो पशुपाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो,

जय हो नन्द लाल की ।

नन्द के आनंद भयो,

जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो,

जय यशोदा लाल की ।

हाथी घोडा पालकी,

जय कन्हिया लाल की ॥

[Santo Ki Vani Lyrics]

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।