नमस्कार भगवन तुम्हें भक्तों का बारम्बार हो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

नमस्कार भगवन तुम्हें,

भक्तों का बारम्बार हो,

नमस्कार भगवन तुम्हें,

भक्तों का बारम्बार हो,

श्रद्धा रुपी भेंट हमारी,

मंगलमय स्वीकार हो

श्रद्धा रुपी भेंट हमारी,

मंगलमय स्वीकार हो ।

तुम कण कण में बसे हुए हो,

तुझ में जगत समाया है ।

तिनका हो चाहे पर्वत हो,

सभी तुम्हारी माया है ।

तुम दुनिया के हर प्राणी के,

जीवन के आधार हो ।

श्रद्धा रुपी भेंट हमारी,

मंगलमय स्वीकार हो ।

नमस्कार भगवन तुम्हें,

भक्तों का बारम्बार हो,

श्रद्धा रुपी भेंट हमारी,

मंगलमय स्वीकार हो ।

सबके सच्चे पिता तुम्ही हो,

तुम्ही जगत की माता हो ।

भाई बंधू सखा सहायक,

रक्षक पोषक दाता हो ।

चींटी से लेकर हाथी तक,

सबके सिरजनहार हो ।

श्रद्धा रुपी भेंट हमारी,

मंगलमय स्वीकार हो ।

नमस्कार भगवन तुम्हें,

भक्तों का बारम्बार हो,

श्रद्धा रुपी भेंट हमारी,

मंगलमय स्वीकार हो ।

ऋषि मुनि योगी जन सब,

तुमसे ही वर पाते हैं ।

क्या राजा क्या रंक तुम्हारे,

दर पर शीश झुकाते हैं ।

परम कृपालु परम दयालु,

करुणा के आधार हो ।

श्रद्धा रुपी भेंट हमारी,

मंगलमय स्वीकार हो ।

नमस्कार भगवन तुम्हें,

भक्तों का बारम्बार हो,

श्रद्धा रुपी भेंट हमारी,

मंगलमय स्वीकार हो ।

तूफानों से घिरे पथिक प्रभु,

तुम ही एक सहारा हो ।

डगमग डगमग नैया डोले,

तुम ही नाथ किनारा हो ।

तुम केवट हो इस नैया के,

और तुम ही पतवार हो ।

नमस्कार भगवन तुम्हें,

भक्तों का बारम्बार हो,

श्रद्धा रुपी भेंट हमारी,

मंगलमय स्वीकार हो ।

- आर्य समाज भजन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।