नमामी राधे नमामी कृष्णम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हे भक्तवृंदों के प्राण प्यारे,

नमामी राधे नमामी कृष्णम,

हे भक्तवृंदों के प्राण प्यारे,

नमामी राधें नमामी कृष्णम,

तुम्ही हो माता पिता हमारे,

तुम्ही हो माता पिता हमारे,

नमामी राधें नमामी कृष्णम,

हे भक्तवृंदों के प्राण प्यारे,

नमामी राधें नमामी कृष्णम ॥

आदि शक्ति श्री राधे रानी,

जय जगजननी जय कल्याणी,

युगल मूर्ति श्री राधे कृष्णा,

दर्शन करत मिटे नही तृष्णा,

दर्शन करत मिटे नही तृष्णा,

दोनो हैं दोनो के नैन-तारे,

दोनो हैं दोनो के नैन-तारे,

नमामी राधें नमामी कृष्णम,

हे भक्तवृंदों के प्राण प्यारे,

नमामी राधें नमामी कृष्णम ॥

सुर मुनि कितने स्वप्न संजोते,

योगी जप तप कर युग खोते,

तब जाकर इस युगल मूर्ति के,

बाल रूप में दर्शन होते;

बाल रूप में दर्शन होते,

ये सृष्टि सारी यही पुकारे,

ये सृष्टि सारी यही पुकारे,

नमामी राधें नमामी कृष्णम,

हे भक्तवृंदों के प्राण प्यारे,

नमामी राधें नमामी कृष्णम ॥

हे भक्तवृंदों के प्राण प्यारे,

नमामी राधे नमामी कृष्णम,

हे भक्तवृंदों के प्राण प्यारे,

नमामी राधें नमामी कृष्णम,

तुम्ही हो माता पिता हमारे,

तुम्ही हो माता पिता हमारे,

नमामी राधें नमामी कृष्णम,

हे भक्तवृंदों के प्राण प्यारे,

नमामी राधें नमामी कृष्णम ॥

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।