श्री राम स्तुति: नमामि भक्त वत्सलं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Ram Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

श्री अत्रि मुनि द्वारा रचित श्रीराम-स्तुति रामायण के अरण्यकाण्ड से संबंधित है।

नमामि भक्त वत्सलं ।

कृपालु शील कोमलं ॥

भजामि ते पदांबुजं ।

अकामिनां स्वधामदं ॥

निकाम श्याम सुंदरं ।

भवाम्बुनाथ मंदरं ॥

प्रफुल्ल कंज लोचनं ।

मदादि दोष मोचनं ॥

प्रलंब बाहु विक्रमं ।

प्रभोऽप्रमेय वैभवं ॥

निषंग चाप सायकं ।

धरं त्रिलोक नायकं ॥

दिनेश वंश मंडनं ।

महेश चाप खंडनं ॥

मुनींद्र संत रंजनं ।

सुरारि वृन्द भंजनं ॥

मनोज वैरि वंदितं ।

अजादि देव सेवितं ॥

विशुद्ध बोध विग्रहं ।

समस्त दूषणापहं ॥

नमामि इंदिरा पतिं ।

सुखाकरं सतां गतिं ॥

भजे सशक्ति सानुजं ।

शची पति प्रियानुजं ॥

त्वदंघ्रि मूल ये नराः ।

भजंति हीन मत्सराः ॥

पतंति नो भवार्णवे ।

वितर्क वीचि संकुले ॥

विविक्त वासिनः सदा ।

भजंति मुक्तये मुदा ॥

निरस्य इंद्रियादिकं ।

प्रयांति ते गतिं स्वकं ॥

तमेकमद्भुतं प्रभुं ।

निरीहमीश्वरं विभुं ॥

जगद्गुरुं च शाश्वतं ।

तुरीयमेव केवलं ॥

भजामि भाव वल्लभं ।

कुयोगिनां सुदुर्लभं ॥

स्वभक्त कल्प पादपं ।

समं सुसेव्यमन्वहं ॥

अनूप रूप भूपतिं ।

नतोऽहमुर्विजा पतिं ॥

प्रसीद मे नमामि ते ।

पदाब्ज भक्ति देहि मे ॥

पठंति ये स्तवं इदं ।

नरादरेण ते पदं ॥

व्रजंति नात्र संशयं ।

॥ दोहा ॥

त्वदीय भक्ति संयुताः ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।