नैनन में श्याम समाए गयो मोहे प्रेम को रोग लगाए गयो

देवी चित्रलेखा
श्री कृष्ण भजन भजन देवी चित्रलेखा
॥ दोहा ॥

नैनन के शर मार के, घायल कीन्हो मोय।
देवी चित्रलेखा कहे, अब तो श्याम ही होय॥

॥ चौपाई ॥

नैनन में श्याम समाए गयो।
मोहे प्रेम को रोग लगाए गयो॥
नैनन में श्याम समाए गयो॥

सखियां पूछें बैद्य बुलाऊं, कौन सी जड़ी बूटी घिस लाऊं।
मैं बोली कोई बैद्य ना काम आवे, जब सांवरिया दिल में समावे॥
मुरली की तान सुनाए गयो।
मोहे प्रेम को रोग लगाए गयो॥

काली कमली वाला यार, कर गयो ऐसा चमत्कार।
सुधबुध अपनी भूल गई मैं, छोड़ दिया सब घर संसार॥
अपना ही दास बनाए गयो।
मोहे प्रेम को रोग लगाए गयो॥

देवी चित्रलेखा गावे हरषाई, मेरे बांके बिहारी ने सुध लीनी।
चरणन में मोहे शरण दीनी, जीवन की तृष्णा हर लीनी॥
भक्ति का रंग चढ़ाए गयो।
मोहे प्रेम को रोग लगाए गयो॥

॥ दोहा ॥

श्याम नाम रस माधुरी, मिटे जगत को रोग।
देवी चित्रलेखा वंदन करे, पाए अलौकिक योग॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

कन्हैया के रूप सौन्दर्य और प्रेम रस से नयनों के माध्यम से अंतरंग में प्रभु के समा जाने की भावाभिव्यक्ति।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।