नैनन में श्याम समाए गयो मोहे प्रेम को रोग लगाए गयो

चित्र विचित्र जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन चित्र विचित्र जी
॥ दोहा ॥

नैनन बान चलाय के, घायल कियो सुजान।
चित्र विचित्र के हिय बस्यो, सुंदर चतुर सुजान॥

॥ चौपाई ॥

नैनन में श्याम समाए गयो।
मोहे प्रेम को रोग लगाए गयो॥
नैनन में श्याम समाए गयो॥

जब से देखि बांकी मूरत।
मन में बसी सांवरी सूरत॥
सुधबुध सारी भुलाए गयो।
मोहे प्रेम को रोग लगाए गयो॥

यमुना तट पे मुरली बजावे।
मीठी तान से मन को लुभावे॥
अपना दास बनाए गयो।
मोहे प्रेम को रोग लगाए गयो॥

चित्र विचित्र कहे बनवारी।
मैं तो हो गई तेरी पुजारी॥
अमृत रस बरसाए गयो।
मोहे प्रेम को रोग लगाए गयो॥

॥ दोहा ॥

प्रेम रोग यह सांवरो, औषध नहिं संसार।
चित्र विचित्र शरण में, पायो सुख अपार॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

श्यामसुंदर के नयनों के आकर्षण और प्रेम के दिव्य रोग में लीन जीवात्मा का मधुर भाव।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।