नैनन में पिचकारी दई श्याम मोपे रंग डारो

इंद्रेश जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन इंद्रेश जी महाराज
॥ दोहा ॥

होरी खेलत नंदलाल संग, ब्रज मंडल आनंद।
इंद्रेश रीझे देख के, सुंदर गोकुल चंद॥

॥ चौपाई ॥

नैनन में पिचकारी दई, श्याम मोपे रंग डारो।
होरी खेलत कान्हा संग, ब्रज नारियां मतवारी॥
नैनन में पिचकारी दई॥

गुलाल उड़े अंबर पे, रंग बरसे चहुं ओर।
राधा संग रास रचे, मेरो माखन चोर॥
केसरिया रंग घोरो, प्रेम रस डारो।
नैनन में पिचकारी दई, श्याम मोपे रंग डारो॥

बरसाने और नंदगाँव की, होरी बड़ी निराली।
लट्ठा मार होरी देखन, आवे दुनिया सारी॥
राधा रानी पे कान्हा ने, रंग गुलाल डारो।
नैनन में पिचकारी दई, श्याम मोपे रंग डारो॥

इंद्रेश कहे ब्रज भूमि में, फाग महोत्सब छायो।
श्याम सलोने कान्हा ने, मन का रंग चुरायो॥
बलिहारी जाऊँ होरी पे, आनंद अपारो।
नैनन में पिचकारी दई, श्याम मोपे रंग डारो॥

॥ दोहा ॥

होरी के इस रंग में, रंग गयो सकल जहान।
इंद्रेश युगल सरकार को, वंदन करे सुजान॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ब्रज मंडल, बरसाना और नंदगाँव की पावन रसभरी होली और श्री राधा-कृष्ण की प्रेममयी फाग लीला का उत्सव गान।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।