माँ सरस्वती! मुझको नवल उत्थान दो

पारंपरिक
माता सरस्वती भजन Bhajan Maa Saraswati Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मुझको नवल उत्थान दो ।

माँ सरस्वती! वरदान दो ॥

माँ शारदे! हंसासिनी,

वागीश! वीणावादिनी । ..x2

मुझको अगम स्वर-ज्ञान दो । ..x2

माँ सरस्वती! वरदान दो ॥

मुझको नवल उत्थान दो।

निष्काम हो मनोकामना,

मेरी सफल हो साधना । ..x2

नव गति, नई लय तान दो । ..x2

माँ सरस्वती! वरदान दो ।

मुझको नवल उत्थान दो ॥

हो सत्य जीवन-सारथी,

तेरी करूँ नित आरती । ..x2

समृद्धि, सुख, सम्मान दो । ..x2

माँ सरस्वती! वरदान दो ।

मुझको नवल उत्थान दो ॥

मन, बुद्धि, हृदय पवित्र हो,

मेरा महान चरित्र हो । ..x2

विद्या, विनय, बल दान दो । ..x2

माँ सरस्वती! वरदान दो ॥

सौ वर्ष तक जीते रहें,

सुख-अमिय हम पीते रहें । ..x2

निज चरण में सुस्थान दो । ..x2

माँ सरस्वती! वरदान दो ।

मुझको नवल उत्थान दो ॥

यह विश्व ही परिवार हो,

सबके लिए सम प्यार हो । ..x2

आदेश लक्ष्य महान दो । ..x2

माँ सरस्वती! वरदान दो ॥

मुझको नवल उत्थान दो ।

माँ सरस्वती! वरदान दो ॥

माँ सरस्वती वंदना | माँ सरस्वती आरती | सरस्वती चालीसा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।