॥ दोहा ॥
द्वार तिहारे आन पड़्यो, पतित उधारक नाथ।
दया दृष्टि अब कीजियो, राखो सर पर हाथ॥
॥ चौपाई ॥
मुझको भी चरणों से लगा लो, हे बांके बिहारी।
मैं तो आया शरण तिहारी, हे बांके बिहारी॥
बड़ा पापी अधम अज्ञानी, फिर भी बालक हूँ तेरा।
अपनी चौखट से मत ठुकराना, मिटा दो भव का फेरा॥
मुझको भी चरणों से लगा लो, हे बांके बिहारी॥
दीनन के दुख हरने वाले, तुम ही पालनहारी।
साध्वी पूर्णिमा विनवे तुमसे, सुन लो अरज हमारी॥
॥ दोहा ॥
श्री बांके बिहारी लाल की जय, शरण गहे की लाज।
पूरण कीजो दास की, सब विनती महाराज॥