मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए

पारंपरिक
श्री राम भजन Bhajan Shri Ram Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

आसरा इस जहाँ का मिले न मिले,

मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए ॥

चाँद तारे फलक पर दिखे ना दिखे,

मुझ को तेरा नज़ारा सदा चाहिए,

धन दौलत जहाँ की मिले ना मिले,

सतगुरु तेरे चरणों की रज चाहिए ॥

यहाँ खुशिया हैं कम, और ज्यादा है गम,

जहाँ देखो वहीँ है देखो भरम ही भरम,

मेरी महफ़िल में शम्मा जले ना जले,

मेरे दिल में उजाला तेरा चाहिए ॥

कभी वैराग है, कभी अनुराग है,

यहाँ बदले हैं माली वही बाग़ है,

मेरी चाहत की दुनिया बसे ना बसे,

मेरे दिल में बसेरा तेरा चाहिए ॥

मेरी धीमी है चाल, और पथ है विशाल,

हर कदम पर मुसीबत अब तू ही संभाल,

पैर मेरे थकें हैं, चले ना चले,

मेरे दिल में इशारा तेरा चाहिए ॥

कभी बैराग है, कभी अनुराग है,

जिन्दगी बिन धुंए की अजब आग है,

मान सम्मान जग में मिले ना मिले,

बस कृपा होनी बाबा तेरी चाहिए ॥

आसरा इस जहाँ का मिले न मिले,

॥ दोहा ॥

मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।