मुझे कैसी फिकर सांवरे साथ तेरा है गर सांवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मुझे कैसी फिकर सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे,

मेरे होंठो पे रहती हंसी,

कोई गम ना बस है ख़ुशी,

मुझे कैसी फ़िक्र सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे ॥

कितनी मुश्किल जो आए,

मैं तो खिलखिलाता रहूं,

तेरी किरपा से विपदाओं को,

दूर भगाता रहूं,

मुझे दुनिया की परवाह नहीं,

सिवा तेरे कोई चाह नहीं,

मुझे कैसी फ़िक्र सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे ॥

मेरे संग में जो तू है,

मैं तेरे गीत गाता रहूं,

तेरी चौखट पे हरदम यूँ ही,

श्याम आता रहूं,

तूने थामा है दामन मेरा,

किया अहसान बाबा बड़ा,

मुझे कैसी फ़िक्र सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे ॥

तेरी महिमा को कान्हा,

यूँ ही गुनगुनाता रहूं,

अपने हाथों से सांवरिये को,

रोज सजाता रहूं,

कभी ना बिछड़ूँ दर से तेरे,

‘हर्ष’ अरमान इतने मेरे,

मुझे कैसी फ़िक्र सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे ॥

मुझे कैसी फिकर सांवरे,

साथ तेरा है गर सांवरे,

मेरे होंठो पे रहती हंसी,

कोई गम ना बस है ख़ुशी,

मुझे कैसी फ़िक्र सांवरे,

॥ दोहा ॥

साथ तेरा है गर सांवरे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।