॥ दोहा ॥
रंग दे ऐसी चुनरिया जो छूटे ना रंग।
जनम जनम प्रभु राखियो अपने ही संग॥
॥ चौपाई ॥
मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे।
अपने ही रंग में रंग ले॥
ऐसा रंग तू रंग दे सांवरिया, जो जनम जनम ना छूटे।
धोबिया धोवे चाहे सारी उमरिया, ये रंग कभी ना छूटे॥
मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे॥
श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया, बिना धोए ना छूटे।
भाव की सुई से प्रेम का धागा, सी दियो मोर जिया रे॥
भवसागर में नाव अटकी, पार लगा दे किनारे॥
मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे॥
॥ दोहा ॥
रंग चढ़्यो जब श्याम को, फीके लागे सब रंग।
दासी पूर्णिमा विनवे, रहे चरणन संग॥