मुझे अपने ही रंग में रंग ले मेरे यार सांवरे

साध्वी पूर्णिमा जी (पूनम दीदी)
श्री कृष्ण भजन भजन साध्वी पूर्णिमा
॥ दोहा ॥

रंग दे ऐसी चुनरिया जो छूटे ना रंग।
जनम जनम प्रभु राखियो अपने ही संग॥

॥ चौपाई ॥

मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे।
अपने ही रंग में रंग ले॥

ऐसा रंग तू रंग दे सांवरिया, जो जनम जनम ना छूटे।
धोबिया धोवे चाहे सारी उमरिया, ये रंग कभी ना छूटे॥
मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे॥

श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया, बिना धोए ना छूटे।
भाव की सुई से प्रेम का धागा, सी दियो मोर जिया रे॥
भवसागर में नाव अटकी, पार लगा दे किनारे॥
मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे॥

॥ दोहा ॥

रंग चढ़्यो जब श्याम को, फीके लागे सब रंग।
दासी पूर्णिमा विनवे, रहे चरणन संग॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

इस भावुक भजन में भक्त श्री कृष्ण के प्रेम के अनूठे रंग में रंग जाने की कामना करता है, जो संसार के सभी सांसारिक आकर्षणों से परे है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।