मुझे अपने ही रंग में रंग ले मेरे यार सांवरे

इंद्रेश जी महाराज
श्री कृष्ण भजन भजन इंद्रेश जी महाराज
॥ दोहा ॥

रंग चढ़े न दूजो कोई, जब चढ़े श्याम को रंग।
इंद्रेश मन भयो बावरो, रहे सांवरिया संग॥

॥ चौपाई ॥

मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे।
मेरे यार सांवरे, दिलदार सांवरे॥
मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे॥

ऐसा रंग तू रंग दे सांवरिया, जो जनम जनम ना छूटे।
दुनिया की सब रीतें छूटे, ये नेह कभी ना टूटे॥
तेरी प्रीत में हो जाऊं मैं तो, भव से पार सांवरे।
मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे॥

नैनन में भर ली तेरी मूरत, मन में बसी तेरी सूरत।
अब तो केवल तुझको चाहूं, ना कोई दूजी जरूरत॥
तेरे द्वारे आके खड़ा हूँ, बन के लाचार सांवरे।
मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे॥

इंद्रेश कहे सुन बांके बिहारी, मैं तो गया बलिहारी।
राधा संग विराजे कान्हा, रूप बड़ा मनोहारी॥
कृपा दृष्टि अब कर दो मुझपे, हे सरकार सांवरे।
मुझे अपने ही रंग में रंग ले, मेरे यार सांवरे॥

॥ दोहा ॥

सांवरिया के प्रेम रंग, रंग गयो तन मन मोर।
इंद्रेश प्रभु के चरण में, बांधो प्रीत की डोर॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

पूज्य श्री इंद्रेश जी महाराज द्वारा भावविभोर होकर गाया गया परम प्रिय भजन, जिसमें भक्त अपने इष्टदेव श्री कृष्ण के अनन्य प्रेम रंग में सदैव के लिए रंग जाने की आर्त प्रार्थना करता है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।