मोरपंख की छड़ी सोहे, जादुई जिसका वार।
झाड़ा लगते ही मिटे, संकट सब इस बार॥
मोरछड़ी लहराई रे, मेरे खाटू वाले ने।
सारे संकट काट दिए, मेरे मुरली वाले ने॥
मोरछड़ी लहराई रे॥
जिसके सिर पर मोरछड़ी का, झाड़ा लग जाता है।
उसका सोया भाग्य सांवरिया, तुरंत जगाता है॥
अमृत रस बरसाई रे, नीले घोड़े वाले ने।
सारे संकट काट दिए, मेरे मुरली वाले ने॥
भूत पिसाच निकट नहीं आवे, काल भी शीश नवावे।
श्याम कृपा से अंधा देखे, निर्धन माया पावे॥
बिगड़ी बात बनाई रे, मेरे लखदातारे ने।
सारे संकट काट दिए, मेरे मुरली वाले ने॥
संजय मित्तल गाए बधाई, खाटू धाम सजाई।
सारे जग में गूँज उठी है, बाबा की तरुणाई॥
मोरछड़ी लहराई रे, मेरे खाटू वाले ने॥
मोरछड़ी की महिमा भारी, रीझे श्याम बिहारी।
संजय मित्तल शरण पड़ा, रक्षा करो मुरारी॥